ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1313.17वाल्मीकि रामायण 13.17कथम् उत्पल पत्र अक्षी रावणस्य वशम् व्रजेत् । विनष्टा वा प्रनष्टा वा मृता वा जनक आत्मजा ॥५-१३-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय