ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1212.20वाल्मीकि रामायण 12.20रूपेण अप्रतिमा लोके वरा विद्या धर स्त्रियः । दृटा हनूमता तत्र न तु राघव नन्दिनी ॥५-१२-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय