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वाल्मीकि रामायण 10.53

स ताम् दृष्ट्वा महा बाहुर् भूषिताम् मारुत आत्मजः ।
तर्कयाम् आस सीता इति रूप यौवन सम्पदा ॥५-१०-५३॥

पूरा अध्याय