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वाल्मीकि रामायण 10.32

नृत्त वादित्र कुशला राक्षस इन्द्र भुज अन्कगाः ।
वर आभरण धारिण्यो निषन्ना दद्र्शे कपिः ॥५-१०-३२॥

पूरा अध्याय