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वाल्मीकि रामायण 10.25

मुक्ता मणि विचित्रेण कान्चनेन विराजता ।
मुकुटेन अपव्र्त्तेन कुण्डल उज्ज्वलित आननम् ॥५-१०-२५॥

पूरा अध्याय