ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 11.136वाल्मीकि रामायण 1.136भूयश्चोर्ध्वं गतिं प्राप्य गिरिं तमवलोकयन् । वायुसूनुर्निरालम्बे जगाम विमलेऽम्बरे ॥५-१-१३६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय