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वाल्मीकि रामायण 8.24

वालि सज्ञम् अमित्रम् ते भ्रातरम् कृत किल्बिषम् ।
शरैः विनिहतम् पश्य विकीर्णम् इव पर्वतम् ॥४-८-२४॥

पूरा अध्याय