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वाल्मीकि रामायण 8.23

कन्क पत्र परिच्छन्ना महेन्द्र अशनि सन्निभाः ।
सुपर्वाणः सुतीक्ष्ण अग्रा सरोषा भुजगा इव ॥४-८-२३॥

पूरा अध्याय