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वाल्मीकि रामायण 67.12

बाहु वेग प्रणुन्नेन सागरेण अहम् उत्सहे ।
समाप्लावयितुम् लोकम् स पर्वत नदी ह्रदम् ॥४-६७-१२॥

पूरा अध्याय