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वाल्मीकि रामायण 61.7

तूर्णम् उत्पत्य च आकाशम् आदित्य पथम् आस्थितौ ।
आवाम् आलोकयावः तत् वनम् शाद्वल संस्थितम् ॥४-६१-७॥

पूरा अध्याय