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वाल्मीकि रामायण 5.31

सीत कपीन्द्र क्षणदा चराणाम्राजीव हेम ज्वलनोपमानानि ।
सुग्रीव राम प्रणय पसङ्गेवामानि नेत्राणि समम् स्फुरन्ति ॥४-५-३१॥

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