ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 4141.29वाल्मीकि रामायण 41.29चन्द्र सूर्य अंशु संकाशः सागर अंबु समाश्रयः । भ्राजते विपुलैः शृन्गैः अम्बरम् विलिखन् इव ॥४-४१-२९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय