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वाल्मीकि रामायण 41.28

तम् अतिक्रम्य लक्ष्मीवान् समुद्रे शत योजने ।
गिरिः पुष्पितको नाम सिद्ध चारण सेवितः ॥४-४१-२८॥

पूरा अध्याय