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वाल्मीकि रामायण 40.52

आसीनम् पर्वतस्य अग्रे सर्व भूत नमस्कृतम् ।
सहस्र शिरसम् देवम् अनंतम् नील वाससम् ॥४-४०-५२॥

पूरा अध्याय