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वाल्मीकि रामायण 40.39

ततो रक्तजलम् भीमम् लोहितम् नाम सागरम् ।
गत्वा प्रेक्ष्यथ ताम् चैव बृहतीम् कूटशाल्मलीम् ॥४-४०-३९॥

पूरा अध्याय