ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 3737.5वाल्मीकि रामायण 37.5अंजन अंबुद संकाशाः कुंजर प्रतिम ओजसः । अंजने पर्वते चैव ये वसन्ति प्लवंगमाः ॥४-३७-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय