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वाल्मीकि रामायण 33.40

सा पान योगात् च निवृत्त लज्जादृष्टि प्रसादात् च नरेन्द्र सूनोः ।
उवाच तारा प्रणय प्रगल्भम्वाक्यम् महार्थम् परिसांत्व रूपम् ॥४-३३-४०॥

पूरा अध्याय