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वाल्मीकि रामायण 33.39

स ताम् समीक्ष्य एव हरि ईश पत्नीम्तस्थौ उदासीनतया महात्मा ।
अवाङ्मुखो आभूत् मनुजेन्द्र पुत्रःस्त्री सन्निकर्षात् विनिवृत्त कोपम् ॥४-३३-३९॥

पूरा अध्याय