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वाल्मीकि रामायण 33.16

महेन्द्र दत्तैः श्रीमद्भिः नील जीमूत संनिभैः ।
दिव्य पुष्प फलैः वृक्षैः शीत च्छायैः मनोरमैः ॥४-३३-१६॥

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