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वाल्मीकि रामायण 31.29

स दीर्घ उष्ण महा उच्छ्वासः कोप संरक्त लोचनः ।
बभूव नर शार्दूल स धूम इव पावकः ॥४-३१-२९॥

पूरा अध्याय