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वाल्मीकि रामायण 31.11

शक्र बाणासन प्रख्यम् धनुः कालांतक उपमः ।
प्रगृह्य गिरि शृंगाभम् मन्दरः सानुमान् इव ॥४-३१-११॥

पूरा अध्याय