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वाल्मीकि रामायण 30.65

प्रिया विहीने दुःख आर्ते हृत राज्ये विवासिते ।
कृपाम् न कुरुते राजा सुग्रीवो मयि लक्ष्मण ॥४-३०-६५॥

पूरा अध्याय