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वाल्मीकि रामायण 30.48

प्रकीर्ण हंसा अकुल मेखलानाम्प्रबुद्ध पद्म उत्पल मालिनीनाम् ।
वापीः उत्तमानाम् अधिक अद्य लक्ष्मीःवर अंगनाम् इव भूषितानाम् ॥४-३०-४८॥

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