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वाल्मीकि रामायण 30.41

व्यपेत पंकजासु स वालुकासुप्रसन्न तोयासु स गो कुलासु ।
स सारसा राव विनादितासुनदिषु हंसा निपतन्ति हृष्टाः ॥४-३०-४१॥

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