Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 30.40

वित्रास्य कारण्डव चक्रवाकान् ।
महा रवैः भिन्न कटा गजेन्द्राः ।सरस्सु बद्ध अंबुज भूषणेषुविक्षोभ्य विक्षोभ्य जलम् पिबन्ति ॥४-३०-४०॥

पूरा अध्याय