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वाल्मीकि रामायण 30.27

शाखासु सप्त च्छद पादपानाम्प्रभासु तार अर्क निशा कराणाम् ।
लीलासु चैव उत्तम वारणानाम्श्रियम् विभज्य अद्य शरत् प्रवृत्ता ॥४-३०-२७॥

पूरा अध्याय