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वाल्मीकि रामायण 30.24

जल गर्भा महा वेगाः कुटज अर्जुन गंधिनः ।
चरित्वा विरताः सौम्य वृष्टि वाताः समुद्यताः ॥४-३०-२४॥

पूरा अध्याय