Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 30.22

दीर्घ गंभीर निर्घोषाः शैल द्रुम पुरोगमाः ।
विसृज्य सलिलम् मेघाः परिश्रांता नृप आत्मज ॥४-३०-२२॥

पूरा अध्याय