ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2929.6वाल्मीकि रामायण 29.6उच्छिन्न राज्य संदेहम् काम वृत्तम् इव स्थितम् । निश्चित अर्थो अर्थ तत्त्वज्ञः काल धर्म विशेष वित् ॥४-२९-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय