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वाल्मीकि रामायण 29.5

क्रीडन्तम् इव देवेशम् गन्धर्व अप्सरसाम् गणैः ।
मंत्रिषु न्यस्त कार्यम् च मंत्रिणाम् अनवेक्षकम् ॥४-२९-५॥

पूरा अध्याय