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वाल्मीकि रामायण 28.50

शीघ्र प्रवेगा विपुलाः प्रपातानिर्धौत शृंग उपतला गिरीणाम् ।
मुक्ता कलाप प्रतिमाः पतन्तोमहा गुह उस्त्संग तलैः ध्रियन्ते ॥४-२८-५०॥

पूरा अध्याय