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वाल्मीकि रामायण 28.49

शैलोपल प्रस्खलमान वेगाःशैलोत्तमानाम् विपुलाः प्रपाताः ।
गुहासु संनादित बर्हिणासुहारा विकीर्यन्त इव अवभान्ति ॥४-२८-४९॥

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