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वाल्मीकि रामायण 28.42

नव अंबु धार आहत केसराणिद्रुतम् परित्यज्य सरोरुहाणि ।
कदंब पुष्पाणि स केसराणिनवानि हृष्टा भ्रमराः पिबन्ति ॥४-२८-४२॥

पूरा अध्याय