वाल्मीकि रामायण 28.24
बाल इन्द्रगोप्ता अंतर चित्रितेनविभाति भूमिः नव शाद्वलेन ।
गात्र अनुपृक्तेन शुक प्रभेणनारी इव लाक्ष उक्षित कंबलेन ॥४-२८-२४॥
बाल इन्द्रगोप्ता अंतर चित्रितेनविभाति भूमिः नव शाद्वलेन ।
गात्र अनुपृक्तेन शुक प्रभेणनारी इव लाक्ष उक्षित कंबलेन ॥४-२८-२४॥