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वाल्मीकि रामायण 27.33

तम् शोचमानम् काकुत्स्थम् नित्यम् शोक परायणम् ।
तुल्य दुःखो अब्रवीद् भ्राता लक्ष्मणो अनुनयम् वचः ॥४-२७-३३॥

पूरा अध्याय