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वाल्मीकि रामायण 27.32

आविवेश न तम् निद्रा निशासु शयनम् गतम् ।
तत् समुत्थेन शोकेन बाष्प उपहत चेतसम् ॥४-२७-३२॥

पूरा अध्याय