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वाल्मीकि रामायण 27.16

प्राचीन वाहिनीम् चैव नदीम् भृशम् अकर्दमम् ।
गुहायाः परतः पश्य त्रिकूटे जह्नवीम् इव ॥४-२७-१६॥

पूरा अध्याय