ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2727.14वाल्मीकि रामायण 27.14गिरि शृंगम् इदम् तात पश्य च उत्तरतः सुभम् । भिन्न अंजन चय आकारम् अंभोधरम् इव उदितम् ॥४-२७-१४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय