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वाल्मीकि रामायण 26.36

अभ्यषिंचंत सुग्रीवम् प्रसन्नेन सुगंधिना ।
सलिलेन सहस्राक्षम् वसवो वासवम् यथा ॥४-२६-३६॥

पूरा अध्याय