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वाल्मीकि रामायण 26.30

ततः कुश परिस्तीर्णम् समिद्धम् जात वेदसम् ।
मंत्र पूतेन हविषा हुत्वा मंत्रविदो जनाः ॥४-२६-३०॥

पूरा अध्याय