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वाल्मीकि रामायण 19.23

शक्रतुल्य पराक्रांतम् वृष्ट्वा इव उपरतम् घनम् ।
नर्दन्तम् नर्दताम् भीमम् शूरम् शूरेण पातितम् ।शार्दूलेन आमिषस्य अर्थे मृग राजम् इव आहतम् ॥४-१९-२३॥

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