ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1717.22वाल्मीकि रामायण 17.22न त्वाम् विनिहत आत्मानम् धर्म ध्वजम् अधार्मिकम् । जाने पाप समाचारम् तृणैः कूपम् इव आवृतम् ॥४-१७-२२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय