ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1414.12वाल्मीकि रामायण 14.12वाली विनिहतो यावद् वने पांसुषु चेष्टते । यदि दृष्टि पथम् प्राप्तो जीवन् स विनिवर्तते ॥४-१४-१२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय