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वाल्मीकि रामायण 1.44

पश्य लक्ष्मण पुष्पाणि निष्फलानि भवन्ति मे ।
पुष्प भार समृद्धानाम् वनानाम् शिशिरात्यये ॥४-१-४४॥

पूरा अध्याय