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वाल्मीकि रामायण 1.3

सौमित्रे शोभते पम्पा वैदूर्य विमल उदका ।
फुल्ल पद्म उत्पलवती शोभिता विविधैः द्रुमैः ॥४-१-३॥

पूरा अध्याय