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वाल्मीकि रामायण 1.2

तत्र दृष्ट्वैवा ताम् हर्षात् इन्द्रियाणि चकम्पिरे ।
स कामवशम् आपन्नः सौमित्रिम् इदम् अब्रवीत् ॥४-१-२॥

पूरा अध्याय