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वाल्मीकि रामायण 74.22

मतंग वनम् इति एव विश्रुतम् रघुनंदन ।
इह ते भावित आत्मानो गुरवो मे महाद्युते ।जुहवान् चक्रिरे नीडम् मंत्रवत् मंत्र पूजितम् ॥३-७४-२२॥

पूरा अध्याय