ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 7474.21वाल्मीकि रामायण 74.21शबरी दर्शयामास तौ उभौ तत् वनम् महत् । पश्य मेघ घन प्रख्यम् मृग पक्षि समाकुलम् ॥३-७४-२१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय