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वाल्मीकि रामायण 73.37

ते तत्र पीत्वा पानीयम् विमलम् चारु शोभनम् ।
अत्यन्त सुख संस्पर्शम् सर्व गन्ध समन्वितम् ॥३-७३-३७॥

पूरा अध्याय