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वाल्मीकि रामायण 73.36

सिक्ता रुधिर धाराभिः संहत्य परम द्विपाः ।
प्रचरन्ति पृथक् कीर्णा मेघ वर्णाः तरस्विनः ॥३-७३-३६॥

पूरा अध्याय